
देश में वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्री ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 के अंत तक देशभर में 500 इथेनॉल पंप शुरू किए जाएंगे। इसके साथ ही 2027 तक इनकी संख्या बढ़ाकर 5,000 करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति के तहत भारत पहले से ही तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब इथेनॉल आधारित ईंधन के लिए अलग पंप स्थापित करने की योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि इथेनॉल के उपयोग को बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम की जाए। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और किसानों को भी अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से कृषि क्षेत्र, चीनी उद्योग और बायोफ्यूल सेक्टर को भी नई गति मिलने की संभावना है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल आधारित ईंधन पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में अपेक्षाकृत पर्यावरण अनुकूल माना जाता है। यदि सरकार अपने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहती है, तो यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है। आने वाले वर्षों में इथेनॉल पंपों का विस्तार देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।



