Aaj Ka Panchang 1 November 2026: अहोई अष्टमी, शुभ मुहूर्त और राहुकाल

आज 1 नवंबर 2026, रविवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष है। आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है और दोपहर के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन अहोई अष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। इस अवसर पर माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार आज चंद्रमा कर्क राशि में संचार करेंगे और पूरे दिन पुष्य नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
आज की तिथि और नक्षत्र
1 नवंबर को कार्तिक कृष्ण सप्तमी तिथि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। आज पुष्य नक्षत्र अगले दिन यानी 2 नवंबर को तड़के 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा। आज साध्य योग दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा, फिर शुभ योग का आरंभ होगा।
आज का सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
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सूर्योदय: सुबह 6 बजकर 33 मिनट
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सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 36 मिनट
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चंद्रोदय: रात 11 बजकर 40 मिनट
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चंद्रास्त: दोपहर 12 बजकर 42 मिनट
आज के शुभ मुहूर्त
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
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अमृत काल: रात 10:25 बजे से 11:56 बजे तक
आज चौघड़िया के अनुसार लाभ का समय सुबह 9:19 बजे से 10:42 बजे तक और अमृत चौघड़िया सुबह 10:42 बजे से दोपहर 12:04 बजे तक रहेगा।
आज का राहुकाल और अशुभ समय
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राहुकाल: शाम 5:30 बजे से 7:00 बजे तक
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गुलिक काल: दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल और अन्य अशुभ समय में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज अहोई अष्टमी का व्रत
आज अहोई अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन के लिए व्रत रखती हैं। महिलाएं दिनभर उपवास करने के बाद शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और व्रत कथा सुनती हैं। परंपरा के अनुसार, रात में तारे दिखाई देने पर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है। अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ समय और तारों के दर्शन का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए।
आज का धार्मिक उपाय
रविवार का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आज सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके साथ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और गेहूं या तांबे का दान करने की परंपरा भी है।
यह पंचांग ज्योतिषीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहुकाल और शुभ मुहूर्त के समय में शहर तथा गणना पद्धति के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।



