
आम आदमी पार्टी के भीतर इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है। राघव चड्ढा से जुड़ा राज्यसभा का मुद्दा सामने आने के बाद पार्टी के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
अब पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अरविंद केजरीवाल के कंधों पर आ गई है, जिन्हें दिल्ली में सरकार को स्थिर बनाए रखना है। खबरों के मुताबिक, करीब 16 विधायकों पर नजर रखी जा रही है, जिससे सियासी समीकरण और भी जटिल हो गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में AAP के लिए यह एक बड़ा टेस्ट साबित हो सकता है। अगर पार्टी इस संकट से उबरती है, तो यह उसकी रणनीतिक मजबूती को दर्शाएगा, वहीं किसी भी तरह की टूट-फूट दिल्ली की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर लगातार बैठकों का दौर जारी है, जहां रणनीति तैयार की जा रही है ताकि किसी भी तरह की टूट को रोका जा सके। अरविंद केजरीवाल के लिए यह समय काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें संगठन और सरकार—दोनों को संतुलित रखना होगा।
अगर स्थिति नियंत्रण में नहीं आती है, तो इसका असर सिर्फ दिल्ली ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आम आदमी पार्टी की छवि पर पड़ सकता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व हर कदम बेहद सावधानी से उठा रहा है और विधायकों को एकजुट रखने की पूरी कोशिश की जा रही है।



