यूपी के बाद राजस्थान में भी अनोखी पहल, स्कूलों में पढ़ाए जाएंगे समाचार पत्र

उत्तर प्रदेश के बाद अब राजस्थान सरकार ने भी शिक्षा व्यवस्था में एक सराहनीय और नवाचारी कदम उठाया है। राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल के तहत स्कूलों की प्रार्थना सभा में अखबार उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि छात्र-छात्राएं प्रतिदिन देश-दुनिया की ताजा खबरों से रूबरू हो सकें। इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करना, सामान्य ज्ञान बढ़ाना और उन्हें समसामयिक घटनाओं से जोड़ना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि अखबार पढ़ने से बच्चों की भाषा, शब्दावली और समझने की क्षमता में सुधार होगा, साथ ही उनमें तार्किक सोच और विश्लेषणात्मक दृष्टि भी विकसित होगी।
इस नई व्यवस्था के तहत शिक्षक बच्चों को अखबार की प्रमुख खबरें समझाएंगे और उन पर चर्चा भी कराई जाएगी। इससे छात्रों को न केवल समाचार पढ़ने की आदत पड़ेगी, बल्कि वे अपनी राय व्यक्त करना और सवाल पूछना भी सीखेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जहां बच्चे मोबाइल और सोशल मीडिया तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं अखबार पढ़ने की यह पहल उन्हें वास्तविक और विश्वसनीय जानकारी से जोड़ने का काम करेगी।
राजस्थान में शुरू की जा रही यह पहल पहले से ही उत्तर प्रदेश में लागू की जा चुकी है, जहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यूपी के स्कूलों में अखबार पढ़ने से बच्चों की पढ़ने-लिखने की क्षमता में सुधार देखा गया है और उनमें सामाजिक व राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान सरकार ने भी इसे अपनाने का फैसला लिया है।
अभिभावकों और शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे प्रतियोगी परीक्षाओं व भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकेंगे। कुल मिलाकर, स्कूलों में समाचार पत्र उपलब्ध कराने की यह पहल शिक्षा को किताबों से आगे ले जाकर व्यावहारिक और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।



