
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक परिवर्तन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को व्यापक स्तर पर बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि भारत डिजिटल क्रांति के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई केवल तकनीक नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और युवाओं के भविष्य को दिशा देने वाला परिवर्तनकारी माध्यम है। सरकार का लक्ष्य है कि एआई को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, स्टार्टअप और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि उत्पादकता बढ़े और नए रोजगार के अवसर सृजित हों।
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत के पास दुनिया की सबसे युवा आबादी है और यदि इसे सही कौशल से जोड़ा जाए तो एआई आधारित अर्थव्यवस्था में भारत वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। इसी दिशा में डिजिटल स्किलिंग, कोडिंग, डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को विस्तार दिया जा रहा है। सरकार का फोकस केवल उच्च तकनीकी संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक भी डिजिटल शिक्षा पहुंचाने पर है, ताकि डिजिटल डिवाइड को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई से पारंपरिक नौकरियां खत्म होने के बजाय नए प्रकार के रोजगार पैदा होंगे। ऑटोमेशन के साथ-साथ एआई विशेषज्ञ, डेटा साइंटिस्ट, एआई ट्रेनर और टेक्निकल सपोर्ट जैसे नए प्रोफाइल तेजी से उभर रहे हैं। भारत का आईटी सेक्टर पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और अब एआई के जरिए यह क्षेत्र और अधिक मजबूत होगा। स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी एआई आधारित नवाचार के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
आर्थिक परिवर्तन के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि एआई से उत्पादन लागत घटेगी, दक्षता बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक सटीक होगी। इससे भारतीय उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकेंगे। कृषि क्षेत्र में स्मार्ट एनालिटिक्स, मौसम पूर्वानुमान और फसल प्रबंधन में एआई का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और टेलीमेडिसिन सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में मदद करेंगी।
अंत में अश्विनी वैष्णव ने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य एआई को “सर्वजन हिताय” के सिद्धांत पर लागू करना है, ताकि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। रोजगार सृजन, कौशल उन्नयन और आर्थिक मजबूती के लिए एआई को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। भारत का लक्ष्य केवल एआई का उपभोक्ता बनना नहीं, बल्कि वैश्विक एआई हब के रूप में उभरना है, जिससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो सके।



