
गाजा में जारी हिंसा और इजरायली हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई देशों ने नागरिक ठिकानों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और तत्काल युद्धविराम की मांग उठाई है। इसी बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की है? भारत का रुख हमेशा से संतुलित और कूटनीतिक रहा है, जहां वह आतंकवाद की निंदा करने के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा पर भी जोर देता रहा है।
गाजा पट्टी में हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव लाया गया, जिसमें मानवीय आधार पर हमलों की निंदा और युद्धविराम की अपील की गई। भारत ने इस प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी संघर्ष में आम नागरिकों की जान की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। हालांकि भारत ने सीधे तौर पर इजरायल का नाम लेकर आलोचना नहीं की, लेकिन उसने हिंसा पर चिंता जरूर जताई। यही वजह है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भारत को उन देशों की सूची में शामिल बताया जा रहा है, जिन्होंने गाजा में सैन्य कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई।
भारत और Israel के संबंध पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। रक्षा, कृषि, तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग रहा है। वहीं भारत पारंपरिक रूप से फिलिस्तीन के अधिकारों का भी समर्थन करता आया है। India ने कई बार दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया है, जिसमें Palestine को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की बात शामिल है।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए। भारत ने मानवीय सहायता पहुंचाने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की वकालत की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नीति ‘संतुलित कूटनीति’ पर आधारित है, जिसमें वह किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह खड़े होने के बजाय शांति और स्थिरता को प्राथमिकता देता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह जरूर दिखाया है कि पश्चिम एशिया की राजनीति में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत अपनी रणनीतिक साझेदारियों और मानवीय मूल्यों के बीच किस तरह संतुलन बनाए रखता है।



