संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले बुलाई गई ऑल पार्टी मीटिंग में जबरदस्त गरमा-गर्मी देखने को मिली। केंद्र सरकार की ओर से यह बैठक सत्र के शांतिपूर्ण संचालन और सर्वदलीय सहयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी, लेकिन यह मंच एक बार फिर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस का अखाड़ा बन गया।
बैठक के दौरान विपक्षी पार्टियों ने सरकार को चार प्रमुख मुद्दों पर आड़े हाथों लिया — मणिपुर हिंसा, महंगाई, पेगासस जासूसी मामला, और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आप, सपा और लेफ्ट दलों ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग बढ़ रहा है और संसद में विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर बहस से बचती है और विधेयकों को बिना चर्चा के पारित करवा रही है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने पेगासस मुद्दे को दोबारा उठाते हुए इसे नागरिक स्वतंत्रता पर हमला बताया। आम आदमी पार्टी ने मणिपुर की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर नाराजगी जताई।
सरकारी पक्ष की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विपक्ष से सहयोग की अपील की और कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है, बशर्ते सदन का संचालन शांतिपूर्ण ढंग से हो।
हालांकि, जिस तरह से इस बैठक में बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि मानसून सत्र में भी संसद के दोनों सदनों में हंगामे की पूरी संभावना है। यह बैठक एक बार फिर यह दर्शाती है कि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की खाई लगातार बढ़ रही है, जिसका असर विधायी कार्यों पर भी पड़ सकता है।
अब देखना होगा कि जब मानसून सत्र औपचारिक रूप से शुरू होगा, तो क्या सरकार विपक्ष की मांगों पर कोई रुख स्पष्ट करेगी, या फिर संसद का यह सत्र भी गतिरोध और हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।



