
केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि वर्ष 2024-25 के दौरान अमेरिका ने अवैध रूप से रह रहे 2,790 भारतीय नागरिकों को वापस भारत भेजा है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, इन भारतीयों को अमेरिका की इमिग्रेशन अथॉरिटी द्वारा विभिन्न राज्यों से हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भारत डिपोर्ट किया गया। सरकार ने बताया कि विदेश मंत्रालय और भारत के दूतावास इन सभी मामलों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित किया गया है कि लौटने वाले नागरिकों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।
सरकारी जानकारी के मुताबिक, ये भारतीय नागरिक बिना वैध वीजा, पासपोर्ट की अवधि समाप्त होने या फर्जी दस्तावेजों के सहारे अमेरिका में रह रहे थे। इनमें से कई लोग अवैध रूप से सीमा पार करके अमेरिका पहुंचे थे, जिन्हें अमेरिकी एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई के दौरान पकड़ा। केंद्र ने बताया कि ऐसे मामलों में भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर नागरिकों की पहचान की पुष्टि करता है और उनके सुरक्षित प्रत्यावर्तन की व्यवस्था करता है।
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि विदेशों में अवैध रूप से रहना न केवल व्यक्ति के लिए जोखिम भरा होता है, बल्कि इससे भारत की छवि पर भी असर पड़ता है। सरकार लगातार लोगों को सचेत कर रही है कि वे किसी भी एजेंट या फर्जी वीजा नेटवर्क के बहकावे में न आएं। विदेश मंत्रालय “मदद पोर्टल” और “प्रवासी भारतीय सुरक्षित” जैसी योजनाओं के माध्यम से नागरिकों को कानूनी और सुरक्षित मार्ग से विदेश जाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि अमेरिका के अलावा कनाडा, यूएई, और ब्रिटेन जैसे देशों से भी हर वर्ष हजारों भारतीयों को अवैध प्रवास के मामलों में वापस भेजा जाता है। इस संदर्भ में भारत सरकार ने कई देशों के साथ प्रत्यावर्तन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए समझौते किए हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे विदेश जाने से पहले सभी दस्तावेजों की सत्यता की जांच करें और केवल अधिकृत माध्यमों से ही वीजा प्रक्रिया पूरी करें। विदेश मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि सरकार हर उस भारतीय के साथ खड़ी है जो विदेश में किसी कानूनी या मानवीय समस्या में फंसा है, लेकिन अवैध प्रवास को किसी भी सूरत में प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता।



