
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया जो मीडिया और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने हंसी-मजाक के अंदाज में कहा, “प्रेस वाले मेरी फोटो क्यों छापें, मैं क्यों गाली खाऊं? सड़क खराब हो तो गाली मुझे ही मिलती है।” इस बयान को सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंस पड़े, लेकिन इसके पीछे गडकरी का गहरा संदेश भी छिपा था।
नितिन गडकरी महाराष्ट्र में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी योजनाओं पर बात की। इसी दौरान उन्होंने मीडिया से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब कोई सड़क खराब होती है, तो लोग सबसे पहले केंद्रीय मंत्री को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने कहा कि “लोगों को यह नहीं दिखता कि सड़क राज्य सरकार या स्थानीय निकाय की है, लेकिन गाली केंद्र सरकार को ही पड़ती है।”
गडकरी ने कहा कि वह मीडिया से नाराज नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि जनता सच्चाई को भी समझे। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों का काम कठिन है, लेकिन जिम्मेदारी के साथ खबरें प्रकाशित की जानी चाहिए ताकि लोगों में भ्रम न फैले। गडकरी का यह बयान एक हल्के-फुल्के लहजे में जरूर था, लेकिन इसमें उनके कार्य की चुनौतियों और सार्वजनिक जवाबदेही का यथार्थ झलकता है।
कार्यक्रम के दौरान गडकरी ने देश में चल रही सड़क परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत आज दुनिया में सबसे तेजी से सड़क निर्माण करने वाले देशों में शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर सड़कों का नेटवर्क तैयार किया जाए, जिससे अर्थव्यवस्था और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिले।
गडकरी के इस बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ ने इसे एक जिम्मेदार मंत्री की सच्ची अभिव्यक्ति बताया, तो कुछ ने इसे हास्य के रूप में लिया। लेकिन एक बात तय है कि नितिन गडकरी का यह बयान उनकी सादगी और साफगोई को एक बार फिर सामने ले आया है — जो उन्हें भारतीय राजनीति में सबसे अलग बनाता है।



