
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुए संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही थी। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने वाली है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, इसलिए किसी भी एक क्षेत्र में संकट का सीधा असर भारत की सप्लाई पर नहीं पड़ेगा।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण आशंका जताई जा रही थी कि यदि इस जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। लेकिन भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों को काफी विविध बनाया है।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अब केवल पारंपरिक खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है, बल्कि अमेरिका, रूस, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका सहित कई क्षेत्रों से तेल आयात कर रहा है। यही वजह है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है। उन्होंने यह भी बताया कि देश में पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार भी मौजूद है, जिससे आपात स्थिति में सप्लाई को बनाए रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने पिछले दशक में ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नए सप्लाई स्रोतों की तलाश, दीर्घकालिक आयात समझौते और रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने से देश को वैश्विक संकटों से निपटने में मजबूती मिली है। इसके अलावा सरकार लगातार नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी निवेश बढ़ा रही है ताकि भविष्य में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके।
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पैदा हुए तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई बड़ा खतरा नजर नहीं आ रहा है। सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की पर्याप्त उपलब्धता है और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।



