
केंद्र सरकार ने संसद के आगामी बजट सत्र से पहले राजनीतिक सहमति और सहयोग का वातावरण बनाने के उद्देश्य से 27 जनवरी को सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया है। इस बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच संसद के सुचारु संचालन, महत्वपूर्ण विधेयकों, आर्थिक प्राथमिकताओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत मंथन होने की उम्मीद है। बजट सत्र को लेकर सरकार का फोकस आर्थिक विकास, महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे के विस्तार और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर रहेगा, वहीं विपक्ष की ओर से महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की स्थिति, सामाजिक न्याय और संघीय ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं। सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से सहमति बनाना और सदन में अनावश्यक गतिरोध से बचना है, ताकि बजट सत्र के दौरान विधायी कार्य प्रभावी ढंग से पूरे किए जा सकें। परंपरागत रूप से ऐसी बैठकों में संसदीय कार्य मंत्री सदन की कार्यसूची और प्रस्तावित विधेयकों की जानकारी साझा करते हैं, जबकि विपक्ष अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराता है। सरकार की कोशिश रहती है कि विपक्ष की रचनात्मक भूमिका सुनिश्चित हो और महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक समर्थन मिले। इस बार की बैठक खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिरता और गति बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ऐसे में बजट से आम जनता और उद्योग जगत दोनों को बड़ी उम्मीदें हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सर्वदलीय बैठक में सकारात्मक माहौल बनता है तो बजट सत्र अधिक उत्पादक हो सकता है और संसद में सार्थक बहस देखने को मिलेगी। वहीं, विपक्ष भी चाहता है कि सरकार उनके सवालों का जवाब दे और जनहित के मुद्दों को गंभीरता से ले। कुल मिलाकर, 27 जनवरी को होने वाली यह सर्वदलीय बैठक बजट सत्र की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है, क्योंकि यहीं से सरकार और विपक्ष के बीच संवाद की रूपरेखा तय होगी और संसदीय लोकतंत्र की मजबूती का संदेश जाएगा।



