
लखनऊ के लोगों के लिए यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक बन गया, जब अंतरिक्ष की रोमांचक यात्रा से लौटकर भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु पहली बार अपने शहर पहुंचे। लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर जैसे ही शुभांशु उतरे, वहां पहले से मौजूद बच्चों की भीड़ ने उन्हें एस्ट्रोनॉट की पोशाक पहनकर गर्मजोशी से स्वागत किया। यह दृश्य बेहद भावुक और गर्व से भर देने वाला था। बच्चों ने हाथों में तिरंगा और पोस्टर थाम रखे थे, जिन पर लिखा था – “वेलकम होम एस्ट्रोनॉट शुभांशु” और “आप पर हमें गर्व है”।
शुभांशु जैसे ही एयरपोर्ट से बाहर आए, उनकी मां और बहन दौड़ती हुई उनसे लिपट गईं और भावुक होकर रो पड़ीं। यह पल देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। वर्षों की मेहनत, समर्पण और धैर्य के बाद जब किसी मां का बेटा अंतरिक्ष से सुरक्षित लौटकर घर आता है, तो वह केवल एक पारिवारिक क्षण नहीं होता – वह पूरे देश की भावनाओं को झकझोर देने वाला पल बन जाता है।
शुभांशु ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे अद्भुत अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में रहना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन वहां जाकर भारत का झंडा फहराना उनके लिए गर्व का विषय था। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस सफलता को केवल अपनी नहीं मानते, बल्कि यह पूरे देश, अपने परिवार और अपने शिक्षकों की प्रेरणा का परिणाम है।
शुभांशु की इस यात्रा ने लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश को गर्व से भर दिया है। शहर में जगह-जगह पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। स्कूलों में उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और बच्चे उनसे प्रेरित होकर एस्ट्रोनॉट बनने का सपना देखने लगे हैं।उनके मोहल्ले के लोग, पड़ोसी और रिश्तेदार भी उन्हें देखकर भावुक हो उठे। लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया और मिठाइयां बांटी। यह दृश्य दर्शाता है कि जब कोई व्यक्ति बड़ी उपलब्धि हासिल करता है, तो उसका असर केवल उसके परिवार पर नहीं, पूरे समाज पर पड़ता है।शुभांशु की यह वापसी सिर्फ एक एस्ट्रोनॉट की घर वापसी नहीं थी, यह एक बेटे, भाई, और देश के सपूत की विजयी वापसी थी, जिसने अंतरिक्ष में जाकर देश का मान बढ़ाया। आने वाले समय में वे युवाओं को प्रेरित करने के लिए सेमिनार और कार्यशालाएं आयोजित करेंगे, ताकि अगली पीढ़ी भी अंतरिक्ष में भारत का प्रतिनिधित्व कर सके।
इस ऐतिहासिक दिन को लखनऊवासी लंबे समय तक याद रखेंगे, और शुभांशु का नाम बच्चों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।



