
भारत और चीन के बीच वर्ष 2020 में हुई गलवान घाटी की हिंसक झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को लंबे समय के लिए प्रभावित किया। इस घटना के बाद सीमा पर तनाव लगातार बना रहा और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ताएं भी हुईं। अब इसी बीच अमेरिका की ओर से एक ऐसा दावा सामने आया है, जिसने रणनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। अमेरिकी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि गलवान संघर्ष के कुछ समय बाद चीन ने बेहद गोपनीय तरीके से परमाणु परीक्षण किया था। यह आरोप सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
अमेरिका का कहना है कि उसके पास ऐसे संकेत और तकनीकी आंकड़े हैं जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि चीन ने लो-यील्ड यानी कम क्षमता वाला न्यूक्लियर टेस्ट किया। हालांकि चीन लंबे समय से परमाणु परीक्षणों पर लगी पाबंदियों का पालन करने की बात कहता रहा है और उसने इन आरोपों को खारिज किया है। बीजिंग का रुख रहा है कि वह अपनी रक्षा क्षमताओं को आधुनिक जरूर बना रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं करता।
विशेषज्ञों की मानें तो अगर यह दावा सही साबित होता है, तो एशिया में शक्ति संतुलन पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। भारत पहले से ही चीन की सैन्य गतिविधियों और मिसाइल क्षमताओं पर करीबी नजर रखता है। ऐसे में परमाणु परीक्षण की खबर नई रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकती है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को लेकर सतर्क हैं।
दूसरी तरफ कई विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि बेहद जरूरी है। बिना ठोस प्रमाण के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल होगा। फिर भी, इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि गलवान के बाद से वैश्विक शक्तियों की नजर चीन की सैन्य गतिविधियों पर पहले से कहीं ज्यादा पैनी हो गई है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर कूटनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है, जिसका असर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर पड़ना तय माना जा रहा है।



