
आतंकवाद के उभरते खतरों से निपटने के लिए आज से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हो रही है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा है जब आतंकवाद के स्वरूप में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक आतंकवाद के साथ-साथ साइबर आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी, फंडिंग के नए डिजिटल माध्यम और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ फैलाने जैसी चुनौतियां तेजी से सामने आ रही हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य इन सभी नए खतरों की गहराई से समीक्षा करना और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एक समन्वित रणनीति तैयार करना है।
इस सम्मेलन में देशभर से सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी, खुफिया तंत्र से जुड़े विशेषज्ञ, राज्यों के पुलिस महानिदेशक, अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि और आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। विभिन्न सत्रों में सीमा पार आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद, आतंकियों की वित्तीय नेटवर्किंग और तकनीक के दुरुपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही, राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय, रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और त्वरित कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया जाएगा।
गृह मंत्री अमित शाह अपने उद्घाटन संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराने के साथ-साथ भविष्य की रणनीति की रूपरेखा प्रस्तुत कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वे सुरक्षा एजेंसियों को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाने, कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर पुलिस सुधारों पर भी बल देंगे। इसके अलावा, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर जाने से रोकने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक पहलुओं पर चर्चा होने की भी संभावना है।
सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया जाएगा, ताकि वैश्विक स्तर पर बदलते आतंकी तौर-तरीकों को समझा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मंच न केवल नीति निर्माण में सहायक होते हैं, बल्कि सुरक्षा बलों के बीच आपसी तालमेल को भी मजबूत करते हैं। कुल मिलाकर, यह सम्मेलन देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे उभरते आतंकवादी खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद मिलेगी।



