
केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी केंद्रीय बजट 1 फरवरी को ही पेश किया जाएगा, भले ही इस वर्ष यह तारीख रविवार को पड़ रही हो। लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि क्या अवकाश के दिन बजट प्रस्तुति की तारीख में कोई बदलाव किया जाएगा, लेकिन सरकार ने परंपरा को कायम रखते हुए तय कार्यक्रम में किसी तरह के संशोधन से इनकार कर दिया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, संसद की विशेष व्यवस्था के तहत रविवार को भी बजट सत्र आयोजित किया जाएगा, ताकि संवैधानिक और आर्थिक प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। गौरतलब है कि वर्ष 2017 से केंद्रीय बजट को 1 फरवरी को पेश करने की परंपरा शुरू हुई थी, ताकि नई वित्तीय योजनाओं को 1 अप्रैल से लागू करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। इससे पहले बजट फरवरी के अंतिम सप्ताह में प्रस्तुत किया जाता था, जिससे राज्यों और मंत्रालयों को योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी का सामना करना पड़ता था। विशेषज्ञों का मानना है कि रविवार को बजट पेश करने से बाजारों पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि शेयर बाजार उस दिन बंद रहते हैं, लेकिन अगले कारोबारी दिन निवेशकों की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। आम जनता की नजर इस बजट में महंगाई नियंत्रण, रोजगार सृजन, टैक्स राहत और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने जैसे मुद्दों पर टिकी हुई है। इसके अलावा किसानों, मध्यम वर्ग और युवाओं के लिए विशेष घोषणाओं की भी उम्मीद जताई जा रही है। सरकार के लिए यह बजट इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह आर्थिक विकास को गति देने और वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा तय करेगा। रविवार को बजट पेश किए जाने की यह स्थिति नई नहीं है, इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण विधेयक और सत्र अवकाश के दिनों में आयोजित किए जा चुके हैं। कुल मिलाकर, 1 फरवरी को बजट पेश करने के फैसले से यह साफ है कि सरकार समयबद्धता और नीतिगत निरंतरता को प्राथमिकता दे रही है, ताकि देश की आर्थिक योजनाएं बिना किसी देरी के आगे बढ़ सकें।



