
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक एक्सक्लूसिव बातचीत में मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में स्थापित अलोकतांत्रिक व्यवस्था ने बांग्लादेश को अराजकता के हवाले कर दिया है। शेख हसीना का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जाता है और जनता की आवाज को दबाने की कोशिश होती है, तो उसका सीधा असर कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ता है। उनके अनुसार, मौजूदा सरकार ने सत्ता को बनाए रखने के लिए संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी की, जिससे जनता का भरोसा शासन से उठता चला गया। शेख हसीना ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश, राजनीतिक विरोधियों पर दमनात्मक कार्रवाई और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के अभाव ने हालात को और बिगाड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की गलत नीतियों के कारण बेरोजगारी बढ़ी, महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी और युवाओं में निराशा फैल गई। इसके परिणामस्वरूप समाज में असंतोष बढ़ा और हिंसा की घटनाएं सामने आने लगीं। शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की स्थिरता लोकतंत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। यदि सरकार जनता के प्रति जवाबदेह नहीं होती, तो अराजकता स्वाभाविक रूप से जन्म लेती है। अपने बयान में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश की जनता शांति और विकास चाहती है, लेकिन इसके लिए मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा जरूरी है। शेख हसीना का मानना है कि जब तक स्वतंत्र चुनाव, निष्पक्ष न्याय व्यवस्था और प्रेस की आजादी सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक देश को मौजूदा संकट से बाहर निकालना मुश्किल होगा। अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि बांग्लादेश की जनता लोकतंत्र की शक्ति को समझती है और सही समय पर देश को फिर से स्थिरता और प्रगति के रास्ते पर ले जाने का निर्णय लेगी।



