
केंद्रीय बजट 2026 हर आम नागरिक, व्यापारी और उद्योग जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है, क्योंकि इसी से तय होता है कि सरकार अगले साल किस सेक्टर पर कितना खर्च करेगी और जनता पर कितना टैक्स बोझ पड़ेगा। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि सरकार के पास यह सारा पैसा आखिर आता कहां से है, जिससे वह विकास योजनाओं, सब्सिडी, रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में अरबों रुपये खर्च करती है। दरअसल सरकार की आमदनी के कई प्रमुख स्रोत होते हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा टैक्स से आता है। इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, जीएसटी, एक्साइज ड्यूटी, कस्टम ड्यूटी और अन्य अप्रत्यक्ष करों के जरिए सरकार को बड़ी रकम मिलती है। आम आदमी से लेकर बड़ी कंपनियों तक, हर कोई किसी न किसी रूप में टैक्स देकर सरकारी खजाने में योगदान देता है। टैक्स के अलावा सरकार को नॉन-टैक्स रेवेन्यू भी मिलता है, जिसमें सरकारी कंपनियों का मुनाफा, रिजर्व बैंक से मिलने वाला लाभांश, ब्याज से होने वाली आय और लाइसेंस फीस जैसी चीजें शामिल होती हैं। इसके साथ ही सरकार अपनी कुछ संपत्तियां या हिस्सेदारी भी बेचती है, जिसे विनिवेश कहा जाता है। जब सरकार किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचती है या जमीन और अन्य संपत्तियों को बेचती है, तो उससे भी बजट के लिए पैसा जुटाया जाता है। हालांकि, इन सभी स्रोतों के बावजूद सरकार की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं, इसलिए उधारी यानी कर्ज लेना भी एक बड़ा जरिया बनता है। सरकार देश के भीतर बैंकों, बीमा कंपनियों और आम जनता से बॉन्ड के जरिए पैसा उधार लेती है, वहीं कभी-कभी विदेशी संस्थानों और देशों से भी कर्ज लिया जाता है। इस उधारी को भविष्य में ब्याज सहित चुकाना होता है, इसलिए यह सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी बन जाती है। इसके अलावा सरकार कुछ विशेष सेस और सरचार्ज भी लगाती है, जो किसी खास उद्देश्य के लिए होते हैं, जैसे शिक्षा सेस या स्वास्थ्य सेस। इन सभी तरीकों से जुटाए गए पैसों को मिलाकर सरकार अपना वार्षिक बजट तैयार करती है और उसे अलग-अलग योजनाओं और विभागों में खर्च करती है। इस तरह टैक्स, नॉन-टैक्स रेवेन्यू, विनिवेश और उधारी मिलकर सरकार के खजाने को भरते हैं और देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।



