
केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर विशेष जोर दिया है। खासतौर पर दूध, तिलहन, फल और सब्जी जैसे रोजमर्रा की जरूरत वाले कृषि उत्पादों के साथ-साथ सहकारी संस्थाओं को राहत देकर किसानों और उपभोक्ताओं—दोनों के हितों को साधने की कोशिश की गई है। बजट में घोषित उपायों का सीधा असर उत्पादन लागत, बाजार उपलब्धता और कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
डेयरी सेक्टर की बात करें तो सरकार ने दूध उत्पादन बढ़ाने, पशुपालन अवसंरचना मजबूत करने और कोल्ड-चेन सुविधाओं के विस्तार पर ध्यान दिया है। इससे छोटे और सीमांत दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार मिलेगा और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी। उत्पादन में वृद्धि होने से मध्यम अवधि में दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमतों में स्थिरता आ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
तिलहन के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य स्पष्ट दिखता है। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए उन्नत बीज, सिंचाई और मूल्य समर्थन से जुड़े प्रावधानों को बल दिया गया है। इससे किसानों को तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू आपूर्ति बढ़ेगी। नतीजतन, खाद्य तेलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होने और दीर्घकाल में महंगाई पर दबाव घटने की संभावना है।
फल और सब्जी क्षेत्र में पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, भंडारण और परिवहन पर निवेश बढ़ाने की घोषणा अहम है। फसल कटाई के बाद होने वाली बर्बादी घटेगी, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और शहरी-ग्रामीण बाजारों में आपूर्ति सुचारु रहेगी। इससे मौसमी महंगाई पर अंकुश लग सकता है और उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर कीमतें मिल सकती हैं।
सबसे बड़ा कदम सहकारी संस्थाओं के लिए ‘कर संजीवनी’ के रूप में सामने आया है। टैक्स प्रावधानों में राहत और अनुपालन को सरल बनाने से डेयरी, कृषि विपणन और ग्रामीण सहकारिताओं की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। सहकारिताएं किसानों को इनपुट, क्रेडिट और बाजार तक पहुंच दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं। कर बोझ कम होने से ये संस्थाएं निवेश बढ़ा सकेंगी, जिसका लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।
कुल मिलाकर, Budget 2026 के ये प्रावधान कृषि मूल्य श्रृंखला को सशक्त करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हैं। यदि नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो दूध, तिलहन, फल और सब्जियों की आपूर्ति बढ़ेगी, कीमतों में स्थिरता आएगी और सहकारी ढांचे के मजबूत होने से ग्रामीण आय में टिकाऊ वृद्धि संभव होगी।



