
धरती पर आपने हमेशा सुना होगा कि पानी और तेल कभी आपस में नहीं मिलते। दोनों का घनत्व और रासायनिक संरचना अलग होने के कारण वे अलग-अलग परतों में बंट जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में जहां गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, वहां इन दोनों का व्यवहार कैसा होता है? हाल ही में अंतरिक्ष में हुए एक प्रयोग ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया जब वहां पानी और तेल ने मिलकर ऐसा मिश्रण बनाया, जिसे अब तक के विज्ञान के नियमों से समझाना मुश्किल हो गया।
यह अनोखा प्रयोग अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) पर किया गया, जहां वैज्ञानिकों ने माइक्रोग्रैविटी वातावरण में तेल और पानी के व्यवहार को परखा। आमतौर पर पृथ्वी पर तेल पानी के ऊपर तैरता है, लेकिन जब गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, तो दोनों तत्व छोटे-छोटे गोलाकार बुलबुलों की तरह आपस में मिल जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना इसलिए होती है क्योंकि अंतरिक्ष में “सतही तनाव” (surface tension) का असर अधिक होता है और गुरुत्वाकर्षण के अभाव में द्रवों का प्राकृतिक विभाजन नहीं हो पाता।
इस प्रयोग के बाद वैज्ञानिकों ने माना कि अंतरिक्ष में द्रवों का अध्ययन हमारे भविष्य के स्पेस मिशन और ईंधन प्रणाली (fuel systems) के लिए बहुत जरूरी है। यह खोज यह भी बताती है कि अगर मनुष्य भविष्य में चांद या मंगल पर स्थायी ठिकाने बनाना चाहता है, तो वहां के वातावरण में द्रव पदार्थों का व्यवहार पृथ्वी से बिल्कुल अलग होगा।
नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के वैज्ञानिक अब इस घटना पर और अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह खोज तरल पदार्थों की रासायनिक संरचना और उनके आपसी संबंधों को समझने के लिए नई दिशा दे सकती है।
यह वाकई अद्भुत है कि जहां पृथ्वी पर तेल और पानी कभी साथ नहीं रहते, वहीं अंतरिक्ष की शून्य गुरुत्वाकर्षण वाली स्थिति में वे एक-दूसरे के साथी बन जाते हैं। यह साबित करता है कि ब्रह्मांड में विज्ञान के नियम भी कभी-कभी अपने अपवादों से चौंका देते हैं।



