तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को भारत रत्न देने की मांग ने एक बार फिर भारत और चीन के बीच राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। देश के 80 से अधिक सांसदों ने एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करते हुए भारत सरकार से आग्रह किया है कि शांति और मानवता के प्रतीक दलाई लामा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” दिया जाए।
यह प्रस्ताव जैसे ही सामने आया, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो चीन की तीखी प्रतिक्रिया तय है। चीन पहले भी दलाई लामा को लेकर भारत की नीतियों पर आपत्ति जताता रहा है।
सांसदों का तर्क है कि दलाई लामा ने दशकों से विश्व में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाया है। उन्होंने भारत को दूसरा घर माना और तिब्बती शरणार्थियों को यहां पर सुरक्षित जीवन दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसलिए अब समय आ गया है कि भारत उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे।
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया जा रहा है। विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की स्वतंत्र नीति और नैतिक नेतृत्व को दर्शाएगा, लेकिन चीन से तनाव भी बढ़ सकता है।
इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ चुकी है। कुछ लोग इसे साहसिक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे भारत-चीन संबंधों को और अधिक जटिल करने वाला निर्णय मान रहे हैं। अब देखना होगा कि भारत सरकार इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेती है।



