
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ब्रिटिश म्यूज़ियम के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर कर राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह समझौता असम की प्राचीन कलाकृतियों, पारंपरिक कला, ऐतिहासिक अभिलेखों और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, शोध और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शनी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। इस एमओयू के माध्यम से ब्रिटिश म्यूज़ियम और असम सरकार मिलकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और प्रदर्शनियों का आयोजन करेंगे।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह समझौता असम की समृद्ध सभ्यता को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। असम की कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक वस्तुएं और सांस्कृतिक स्मृतियां लंबे समय से ब्रिटेन के प्रमुख संग्रहालयों में संरक्षित हैं। अब इस साझेदारी के माध्यम से न केवल इन पर संयुक्त शोध होगा, बल्कि असम के कलाकारों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य में असम की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं।
एमओयू के तहत दोनों पक्ष डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन, संरक्षण तकनीक के आदान-प्रदान और विरासत वस्तुओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देंगे। आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर प्राचीन कलाकृतियों को संरक्षित करने और उनकी प्रतिकृतियां तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। इसके साथ ही असम की धरोहरों को लेकर विशेष प्रदर्शनी ब्रिटिश म्यूज़ियम में लगाने की योजना भी चर्चा में है, जिससे विश्वभर के लोगों को असम की अनोखी संस्कृति से परिचित कराया जा सकेगा।
असम सरकार का मानना है कि इस सहयोग से पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब असम की कला और इतिहास की चर्चा बढ़ेगी, तो दुनिया भर से शोधकर्ता, पर्यटक और कला प्रेमी राज्य का रुख करेंगे। इससे आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर राज्य को फायदा होगा।
यह समझौता भारत-ब्रिटेन के सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा और असम की पहचान को वैश्विक मंच पर चमकाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



