
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में बढ़ती प्रवासी आबादी को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध और अनियंत्रित प्रवास की समस्या पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो असम की जनसांख्यिकीय संरचना पर गहरा असर पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सिर्फ जनसंख्या का प्रश्न नहीं है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक ताने-बाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रवासियों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो भविष्य में असम की स्थिति कमजोर हो सकती है। सरमा का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रहे अवैध प्रवेश से स्थानीय लोगों के अधिकारों पर असर पड़ रहा है और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि कानून के दायरे में रहकर राज्य के हितों की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और सीमा प्रबंधन को लेकर केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही। उनका मानना है कि जब तक सीमाओं की प्रभावी निगरानी नहीं होगी और अवैध घुसपैठ पर सख्ती नहीं की जाएगी, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। सरमा ने यह भी जोड़ा कि असम की मूल भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे भय पैदा करने वाला बयान बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने जमीनी सच्चाई को सामने रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासन एक संवेदनशील विषय है, जिसे मानवीय दृष्टिकोण और संवैधानिक प्रावधानों के साथ संतुलित तरीके से सुलझाने की जरूरत है। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री हिमंता सरमा का यह बयान एक बार फिर असम में प्रवासन, पहचान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया है, जिस पर ठोस और दीर्घकालिक नीति की आवश्यकता महसूस की जा रही है।



