सीएम योगी ने ढोल-नगाड़ों संग किया जनजाति भागीदारी उत्सव का शुभारंभ

उत्तर प्रदेश में जनजातीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित ‘जनजाति भागीदारी उत्सव’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच किया। इस मौके पर उनका बिल्कुल अलग और उत्साही अंदाज देखने को मिला। पारंपरिक वाद्यों की ताल पर सीएम योगी का जनजातीय कलाकारों के बीच शामिल होना न केवल एक अनोखा दृश्य था, बल्कि यह संदेश भी था कि राज्य सरकार जनजातीय समुदाय के सम्मान और सहभागिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
उत्सव की शुरुआत पारंपरिक जनजातीय नृत्य और संगीत से हुई, जिसमें सीएम योगी ने स्वयं कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और वीरता उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और ऐसी पहलें उनके गौरव को नई पहचान देने का माध्यम हैं। कार्यक्रम में विभिन्न जनजातीय समूहों द्वारा प्रदर्शित कला, हस्तशिल्प, वन उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन मुख्य आकर्षण रहे।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का उद्देश्य जनजातीय समुदाय को सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाना है। इसी दिशा में ‘वन धन योजना’, कौशल विकास कार्यक्रम, जनजातीय छात्रावास, आवास योजना और वनाधिकार पट्टों का वितरण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में पहली बार जनजातीय नायकों के योगदान को स्कूल पाठ्यक्रम, संग्रहालयों और उत्सवों में प्रमुखता दी जा रही है, जिससे नए पीढ़ी को प्रेरणा मिले।
कार्यक्रम में विशेष रूप से जनजातीय महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जो उनकी आजीविका बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार इन उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने के लिए भी नए कदम उठा रही है।
कुल मिलाकर, ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच शुरू हुआ यह उत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के सम्मान और सहभागिता का प्रतीक था। सीएम योगी का सरल, उत्साहपूर्ण और सहभागी अंदाज इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में जनजातीय विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी और उनकी सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने नई पहचान मिलेगी।



