Contraceptives Pills, IUD और बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट्स जैसी गर्भनिरोधक दवाइयों को लेकर अमेरिका में फिर से बवाल छिड़ा हुआ है। इसकी जड़ें सीधे तौर पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों से जुड़ी हुई हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं और महिला अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डाला है। रिपब्लिकन नेतृत्व, खासकर ट्रंप समर्थित राज्य सरकारें, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में फंडिंग कटौती और धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर गर्भनिरोधक सुविधाओं को सीमित करने की कोशिश कर रही हैं। इससे करोड़ों डॉलर की गर्भनिरोधक दवाएं बर्बादी के कगार पर पहुँच चुकी हैं।
ट्रंप प्रशासन ने कार्यकाल के दौरान एक ऐसा नियम लागू किया जिसमें नियोक्ता (employers) को यह अधिकार दिया गया कि यदि उनकी धार्मिक या नैतिक मान्यताएं उन्हें गर्भनिरोधक कवरेज देने से रोकती हैं, तो वे अपने कर्मचारियों को यह सुविधा देने से इनकार कर सकते हैं। इस निर्णय से Affordable Care Act के तहत चल रही गर्भनिरोधक सेवाओं को भारी झटका लगा। इससे कई अस्पतालों, NGO और सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठनों को लाखों डोज़ गर्भनिरोधक गोलियों और IUDs को या तो नष्ट करना पड़ा या स्टोर में ही रखे-रखे एक्सपायर होने दिया गया।
इस नीति का असर खासकर निम्न आय वर्ग की महिलाओं पर पड़ा है, जो Medicaid या सरकारी बीमा योजनाओं पर निर्भर थीं। उन्हें अब या तो अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं, या विकल्प की अनुपलब्धता के कारण बिना गर्भनिरोधक के रहना पड़ता है — जिससे अनचाहे गर्भ, गर्भपात और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बर्थ कंट्रोल इम्प्लांट्स और IUDs जैसी आधुनिक तकनीकों को भी अब कई राज्यों में सीमित कर दिया गया है। कुछ राज्यों में तो डॉक्टरों को बिना कानूनी बाधा के गर्भनिरोधक न देने की छूट दे दी गई है। इससे महिला स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता और असुरक्षा दोनों बढ़ी हैं।
महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और हेल्थकेयर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक एजेंडा है, जिसका मकसद महिला शरीर पर नियंत्रण को फिर से पारंपरिक और धार्मिक दायरे में बाँधना है। इससे न सिर्फ मेडिकल स्टॉक की बर्बादी हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
निष्कर्षतः, ट्रंप प्रशासन की नीतियाँ सिर्फ बर्थ कंट्रोल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस को जन्म देती हैं, जिसमें महिला अधिकार, धार्मिक आज़ादी और सार्वजनिक स्वास्थ्य—तीनों टकरा रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में अमेरिका में महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा और गर्भनिरोधक पहुंच और भी संकटग्रस्त हो जाएगी।



