
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की अमेरिका यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा हंगामा मचा हुआ है। इस दौरे को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ है, उसका गहरा संबंध 9/11 आतंकी हमलों से जुड़ी पुरानी बहस से है। अमेरिका में 9/11 पीड़ितों के परिवार लंबे समय से सऊदी सरकार से जवाब मांगते रहे हैं, क्योंकि 2001 के हमलों में शामिल 19 आतंकियों में से 15 सऊदी नागरिक थे। हालांकि सीधे तौर पर सऊदी सरकार की संलिप्तता कभी साबित नहीं हुई, लेकिन अमेरिका के कई समूह और पीड़ित परिवार मानते हैं कि सऊदी अधिकारियों ने उन आतंकियों को अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था। इसी पृष्ठभूमि में MBS का यह दौरा एक बार फिर पुराने घावों को ताज़ा कर रहा है।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पिछले कुछ वर्षों में विश्व राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में उभरे हैं और अमेरिका के साथ उनके संबंधों ने कई बार उतार-चढ़ाव देखे हैं। बाइडेन प्रशासन ने शुरू में सऊदी अरब पर मानवाधिकारों को लेकर कठोर रुख अपनाया था, खासकर पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद। लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट, मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और अमेरिका की रणनीतिक जरूरतों ने परिस्थितियों को बदल दिया, जिसके चलते MBS का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन्हीं कारणों से अमेरिकी राजनीति में भी इस यात्रा को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
9/11 पीड़ित परिवारों ने MBS की यात्रा के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज किया है। उनका कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती और न्याय नहीं मिलता, तब तक सऊदी नेतृत्व को अमेरिकी स्वागत नहीं मिलना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हितों को देखते हुए सऊदी अरब के साथ संवाद बेहद ज़रूरी है। सुरक्षा, तेल उत्पादन, रक्षा सहयोग और मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने जैसे मुद्दों पर दोनों देशों की साझेदारी अहम भूमिका निभाती है।
यह विवाद अमेरिका-सऊदी रिश्तों की जटिलता और इतिहास में छिपे तनावों को उजागर करता है। MBS के इस दौरे से जहां दोनों देशों के सामरिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है, वहीं 9/11 कनेक्शन पर उठते सवाल इस यात्रा पर राजनीतिक साया डालते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह दौरा संबंधों में नई मजबूती लाता है या विवादों का नया दौर शुरू करता है।



