
G-7 समिट 2025 के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर देश की कूटनीतिक सक्रियता का बेहतरीन उदाहरण पेश किया। उन्होंने जर्मनी, फ्रांस, इटली और जापान समेत कई प्रमुख देशों के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। इन बैठकों में वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
एस. जयशंकर ने जर्मन विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” और “क्लीन एनर्जी इनिशिएटिव” के तहत संयुक्त निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्री के साथ बैठक में रक्षा सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वैश्विक चुनौतियों का सामना सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है।
इटली के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता में व्यापार, निवेश और संस्कृति के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। जयशंकर ने भारत की “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” नीतियों की सफलता साझा करते हुए विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार में निवेश के लिए आमंत्रित किया। इसके अलावा, उन्होंने जापान के विदेश मंत्री से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के विषय पर बातचीत की।
इन बैठकों से यह स्पष्ट है कि भारत अब केवल एक सहभागी राष्ट्र नहीं, बल्कि एक वैश्विक निर्णय-निर्माता के रूप में उभर रहा है। जयशंकर ने अपने वक्तव्यों में कहा कि भारत विश्व में शांति, स्थिरता और विकास का समर्थक है और हर वैश्विक मुद्दे पर रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है।
G-7 समिट में हुई इन मुलाकातों से भारत की राजनयिक साख और अंतरराष्ट्रीय प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर की ये मुलाकातें आने वाले वर्षों में भारत की विदेश नीति को और अधिक प्रभावशाली बनाएंगी।



