दिल का ट्रांसप्लांट एक जटिल और महंगा ऑपरेशन माना जाता है, जिसका खर्च आमतौर पर ₹1 करोड़ तक पहुंच जाता है। लेकिन अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI), लखनऊ में इस तरह की जटिल सर्जरी अब मात्र ₹5 लाख में की जाएगी।
SGPGI की टीम ने इस महत्त्वपूर्ण पहल के लिए हर सप्ताह ड्राई रन (प्रैक्टिस) शुरू कर दी है, जिससे ऑपरेशन के हर पहलू को बेहतर और कुशल बनाया जा सके। ड्राई रन का मतलब है कि डॉक्टर और चिकित्सा कर्मचारी वास्तविक ऑपरेशन से पहले बिना हार्ट के अभ्यास कर रहे हैं ताकि जब दिल उपलब्ध हो, तो सर्जरी बिना किसी बाधा के हो सके।
भारत में हार्ट ट्रांसप्लांट की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन सीमित संसाधनों और महंगी लागत के कारण कई मरीज इस ऑपरेशन से वंचित रह जाते हैं। SGPGI का यह प्रयास इस समस्या का समाधान लेकर आया है। कम लागत में बेहतर गुणवत्ता वाली सेवा देकर ज्यादा से ज्यादा मरीजों की जान बचाई जाएगी।
इस योजना के तहत मरीजों को हार्ट मिलने पर तुरंत सर्जरी की जाएगी, जिससे ऑपरेशन का समय कम होगा और सफलता की संभावना बढ़ेगी। साथ ही अस्पताल में नए उपकरण और तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि जटिल प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके।
सभी डॉक्टर, नर्स, तकनीशियन मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में लगे हैं। उनका मानना है कि बेहतर तैयारी और कम खर्च में हार्ट ट्रांसप्लांट देश में चिकित्सा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
इस योजना से न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को लाभ मिलेगा, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित होंगे। SGPGI का लक्ष्य है कि लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ पूरे उत्तर भारत में यह सुविधा उपलब्ध हो।
इस पहल से हजारों हार्ट पेशेंट्स को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार ने इस योजना को समर्थन भी दिया है, ताकि भविष्य में इसे और ज्यादा फैलाया जा सके।
इस परियोजना से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द ही अन्य अंगों के ट्रांसप्लांट भी इसी तरह सस्ते और प्रभावी बनाए जाएंगे।
साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए कैंपेन चलाए जा रहे हैं ताकि वे अंग दान के महत्व को समझें और समय पर अपनी सहमति दें।



