
अफगानिस्तान में रविवार देर रात आए भीषण भूकंप ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.4 मापी गई, जिससे काबुल, हेरात, कंधार और आसपास के कई जिलों में धरती जोर से हिल गई। अचानक आए इस झटके से लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले मैदानों की ओर भागे। कई मकान, मस्जिदें और स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान हेरात और फराह प्रांत में हुआ है। कई गांवों में घर पूरी तरह धराशायी हो गए हैं और मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में कठिनाइयां आ रही हैं क्योंकि भूकंप के बाद सड़कों में दरारें पड़ गई हैं और कई जगह संचार व्यवस्था ठप हो गई है। अफगानिस्तान की अस्थिर राजनीतिक स्थिति और सीमित संसाधनों के कारण बचाव कार्यों में देरी भी हो रही है।
अफगानिस्तान में पिछले कुछ महीनों में यह तीसरा बड़ा भूकंप है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर झटके महसूस किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति पर चिंता जताते हुए तत्काल मानवीय सहायता भेजने की घोषणा की है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके इतने तेज थे कि कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति ठप हो गई और लोग भय के माहौल में पूरी रात खुले में गुजारने को मजबूर हुए। अस्पतालों में घायलों की लंबी कतारें हैं और चिकित्सा सुविधाएं कम पड़ रही हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आपात मदद की अपील की है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटके) की संभावना बनी हुई है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इस त्रासदी ने एक बार फिर अफगानिस्तान को मानवीय संकट की कगार पर ला खड़ा किया है, जहां पहले से ही गरीबी, राजनीतिक अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं ने लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना रखा है।



