
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइबर फ्रॉड और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन को अलग-अलग माध्यमों से संचालित किया जा रहा था। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में धन को कई खातों और माध्यमों से घुमाकर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है।
जांच एजेंसी के अनुसार, करीब 61 हजार मशीनों के इस्तेमाल से 2904 करोड़ रुपये की नकदी जमा कराई गई। इतनी बड़ी रकम और मशीनों की संख्या ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। अब ED यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और रकम आखिर किन लोगों या संस्थाओं तक पहुंची।
साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच इस तरह के नेटवर्क एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। फर्जी निवेश, ऑनलाइन जॉब, डिजिटल पेमेंट और अन्य साइबर ठगी के जरिए हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर उसका मनी ट्रेल छिपाने की कोशिश की जाती है। हाल के मामलों में ED ने ऐसे नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों पर भी कार्रवाई की है।
देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए जांच और वित्तीय निगरानी एजेंसियों के बीच समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, साइबर फ्रॉड की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में संदिग्ध रकम को फ्रीज कर पीड़ितों को वापस कराने की प्रक्रिया की गई है।
अब ED की जांच का फोकस इस नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने लाने पर है। 20 राज्यों में फैले इस कथित नेटवर्क से जुड़े खातों, मशीनों, लेनदेन और संदिग्ध संस्थाओं की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि साइबर ठगी की रकम किस तरह जमा, ट्रांसफर और इस्तेमाल की जाती थी।



