राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भावुक संबोधन

राम जन्मभूमि पर राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित भव्य उत्सव कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भावुक और प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने कहा, “ये वही भूमि है जो वर्षों तक रक्तरंजित रही है, संघर्ष, त्याग और तपस्या की साक्षी बनी है। आज उसी भूमि पर शांति, श्रद्धा और सांस्कृतिक चेतना का उत्सव मनाया जा रहा है।” राजनाथ सिंह के शब्दों में अयोध्या केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण किसी एक वर्ग या विचारधारा की जीत नहीं, बल्कि देश की एकता, सहिष्णुता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सफलता का प्रमाण है।
रक्षा मंत्री ने अपने भाषण में वर्षों तक चले आंदोलन, संतों, कारसेवकों और आम नागरिकों के त्याग का स्मरण करते हुए कहा कि यह वही धरती है जहां कभी विवाद, हिंसा और अस्थिरता का दौर देखा गया, लेकिन आज यहां भक्ति, विश्वास और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम केवल पूजा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे मर्यादा, कर्तव्य, न्याय और लोककल्याण के आदर्श हैं, जिनसे आज की पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि अयोध्या का पुनर्निर्माण भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का संकेत है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि संवैधानिक दायरे में रहकर, शांतिपूर्ण तरीके से इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा किया गया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि यह भारत की सभ्यता, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने देशवासियों से भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब हम सत्य, करुणा, त्याग और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर चलेंगे, तभी इस पवित्र भूमि के संघर्ष और बलिदान का सही अर्थ सिद्ध होगा। राम लला प्राण प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ का यह समारोह न केवल अतीत की पीड़ा को स्मरण करने का अवसर बना, बल्कि एक समरस, सशक्त और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प भी।



