यूपी में फॉरेंसिक क्रांति: उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टिट्यूट की स्थापना, 12 लैब से तेज होगी जांच

उत्तर प्रदेश में अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने फॉरेंसिक साइंस सिस्टम को व्यापक रूप से लागू करते हुए जांच व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ दिया है। इसी क्रम में लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक इंस्टिट्यूट की स्थापना की गई है, जो पूरे राज्य के लिए एक केंद्रीय विशेषज्ञ संस्था के रूप में काम कर रहा है। पहले जहां प्रदेश में गिनी-चुनी दो या तीन फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं ही कार्यरत थीं, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 12 हो चुकी है। इससे मामलों की जांच में तेजी आने के साथ-साथ साक्ष्यों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है।
नई लैब के शुरू होने से पुलिस और जांच एजेंसियों को डीएनए, नारको, बॉलिस्टिक, साइबर फॉरेंसिक और दस्तावेज परीक्षण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं राज्य के भीतर ही उपलब्ध हो रही हैं। पहले कई मामलों में नमूनों को बाहर भेजना पड़ता था, जिससे समय अधिक लगता था और न्याय में देरी होती थी। अब स्थानीय स्तर पर जांच संभव होने से केस की प्रगति तेज हो रही है और अदालतों में मजबूत चार्जशीट दाखिल करने में मदद मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फॉरेंसिक ढांचे के विस्तार से दोषियों के बच निकलने की संभावना कम होती है और निर्दोषों को भी राहत मिलती है। वैज्ञानिक साक्ष्य न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं। यही कारण है कि सरकार लगातार नई तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक उपकरणों पर निवेश कर रही है। आने वाले समय में प्रत्येक रेंज स्तर पर और सुविधाएं विकसित करने की योजना भी बताई जा रही है।
फॉरेंसिक साइंस के इस मजबूत नेटवर्क से प्रदेश की कानून व्यवस्था को नई धार मिली है। अपराधियों में डर का माहौल बनेगा, वहीं पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत होगी। तेज, पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था किसी भी विकसित राज्य की पहचान होती है, और उत्तर प्रदेश इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ता दिख रहा है। अगर इसी तरह बुनियादी ढांचे का विस्तार जारी रहा तो प्रदेश देश में फॉरेंसिक जांच के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।



