
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए व्यापक योजना तैयार की है। विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर सरकार की रणनीति और तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कई स्तरों पर समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और वहां रहने वाले भारतीयों के साथ संपर्क में हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और वापस भारत लाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने एयरलाइंस कंपनियों और अन्य एजेंसियों के साथ भी समन्वय किया है, ताकि संकट की स्थिति में तुरंत उड़ानों की व्यवस्था की जा सके।
विदेश मंत्री के अनुसार सरकार ने एक मजबूत इवैक्यूएशन मैकेनिज्म तैयार किया है, जिसमें दूतावास, स्थानीय प्रशासन और भारतीय समुदाय संगठनों की मदद ली जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना और वायुसेना की मदद से भी नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा सकता है। अतीत में भी भारत ने कई बार संकटग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के सफल अभियान चलाए हैं, जिनमें हजारों लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया था।
जयशंकर ने राज्यसभा को भरोसा दिलाया कि सरकार मिडिल ईस्ट की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और किसी भी परिस्थिति में भारतीयों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने वहां रहने वाले भारतीयों से भी अपील की कि वे स्थानीय भारतीय दूतावासों के संपर्क में रहें और जारी किए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
सरकार का कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाने की पूरी तैयारी है। इस दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता भी जारी है, ताकि क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम हो सके। कुल मिलाकर भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के किसी भी कोने में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और संकट की घड़ी में उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।



