
अमेरिकी कारोबारी Jeffrey Epstein से जुड़े कई खुलासों के बीच यह जानकारी भी सामने आई थी कि वह अपनी निजी नर्सरी में धतूरे का पौधा उगाता था। धतूरा एक ऐसा पौधा है जो जितना रहस्यमय है, उतना ही विवादों में भी रहता है। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इसका सीमित और नियंत्रित उपयोग बताया गया है, लेकिन इसकी तासीर बेहद तीव्र और नशीली होती है। धतूरे के बीज और पत्तियों में पाए जाने वाले रसायन मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका सेवन खतरनाक माना जाता है। दुनिया के कई हिस्सों में इसे एक विषैला और मतिभ्रम पैदा करने वाला पौधा माना जाता है। हालांकि भारतीय संस्कृति में इसका एक अलग ही धार्मिक महत्व है। धतूरे का फूल भगवान Shiva को अर्पित किया जाता है और सावन तथा महाशिवरात्रि जैसे पर्वों पर विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को ग्रहण करने वाले शिव को यह पुष्प प्रिय है। इसी कारण मंदिरों में धतूरे के फल और फूल चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो धतूरा सोलानेसी परिवार का पौधा है, जिसमें एट्रोपीन और स्कोपोलामीन जैसे तत्व पाए जाते हैं। यही तत्व इसे औषधीय और नशीला दोनों बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अनियंत्रित उपयोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। इस तरह धतूरा एक ऐसा पौधा है जो एक ओर धार्मिक आस्था से जुड़ा है तो दूसरी ओर अपने रासायनिक गुणों के कारण सावधानी की मांग करता है।



