ईरान और इजरायल के बीच हाल ही में हुए तनावपूर्ण संघर्ष के बाद अब पहली बार ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। युद्ध के दौरान सुरक्षा कारणों से वे लंबे समय तक गुप्त बंकर में रह रहे थे, लेकिन अब वे तेहरान में एक धार्मिक सभा को संबोधित करते दिखाई दिए।
उनकी उपस्थिति को ईरानी सरकार की ओर से यह संकेत माना जा रहा है कि हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। खामेनेई ने अपने संबोधन में ईरानी जनता से धैर्य और एकता बनाए रखने की अपील की और इजरायल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “दुश्मन को उसकी आक्रामकता का उचित जवाब दिया गया है।”
यह सार्वजनिक रूप से उनकी पहली मौजूदगी है जब से ईरान पर इजरायली हमले और जवाबी कार्रवाई हुई थी। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, खामेनेई की वापसी से ईरान में राजनीतिक स्थिरता का संकेत मिल सकता है, हालांकि पश्चिमी देशों में इसे रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
अयातुल्ला खामेनेई का बंकर से बाहर निकलकर सार्वजनिक मंच पर आना केवल एक सामान्य उपस्थिति नहीं, बल्कि यह ईरान के लिए रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक जीत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय तक उनकी अनुपस्थिति को लेकर सोशल मीडिया और पश्चिमी मीडिया में अटकलें लगाई जा रही थीं — कहीं वे घायल तो नहीं? या फिर सत्ता संघर्ष की स्थिति तो नहीं? लेकिन इस उपस्थिति ने इन सभी अटकलों को विराम दे दिया।
खामेनेई ने अपने संबोधन में खासतौर पर ईरानी युवाओं और सेना की तारीफ की और कहा कि “देश ने संकट के समय संयम और साहस दिखाया।” उन्होंने ईरानियों से कहा कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकार व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ खड़े रहें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आंतरिक आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी चरम पर है।
अपने भाषण में खामेनेई ने इजरायल को सीधे चेतावनी दी कि “यदि ईरान की संप्रभुता को फिर से ललकारा गया, तो जवाब और भी कठोर होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष में ईरान ने दिखा दिया कि वह केवल बयान नहीं, बल्कि कड़ी कार्रवाई में भी सक्षम है। यह बयान भविष्य में किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई की भूमिका तैयार करने जैसा माना जा रहा है।



