आज के समय में जब अदालतों में वकीलों की फीस और कानूनी प्रक्रिया दोनों ही आम आदमी के लिए भारी साबित होती हैं, एक शख्स ने बिना पैसे और वकील के खुद ही कोर्ट में अपना तलाक केस लड़कर सबको चौंका दिया। यह मामला एक ऐसे व्यक्ति का है जिसकी पत्नी ने तलाक की अर्जी देते हुए उस पर कई गंभीर आरोप लगाए थे – घरेलू हिंसा से लेकर बेरोजगारी और शराब की लत तक।
आम तौर पर ऐसे मामलों में पति को अपनी बात रखने के लिए किसी अच्छे वकील की जरूरत पड़ती है, लेकिन इस शख्स की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वह वकील नहीं रख सका। उसने तय किया कि वह खुद कानून पढ़ेगा, दस्तावेज़ तैयार करेगा और कोर्ट में अपनी बात पूरी सच्चाई और प्रमाणों के साथ रखेगा।
उसने RTI, मुफ्त लीगल हेल्प डेस्क और इंटरनेट की मदद से भारतीय दांपत्य कानून, पारिवारिक न्यायालय की प्रक्रिया और जरूरी सबूत कैसे पेश किए जाते हैं – यह सब सीखा। कोर्ट में उसने धैर्य और ईमानदारी के साथ जवाब दाखिल किए और पत्नी के लगाए गए झूठे आरोपों को धीरे-धीरे तर्क और प्रमाणों के जरिए काटा।
आख़िरकार महीनों की सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह माना कि पत्नी के आरोप निराधार थे और दोनों के बीच आपसी सामंजस्य पूरी तरह खत्म हो चुका है। कोर्ट ने कानूनी रूप से तलाक को मंजूरी दी। इस शख्स की कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन सकती है जो आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव में न्याय पाने से वंचित रह जाते हैं।
यह केस यह भी दिखाता है कि अगर कोई व्यक्ति खुद को कानून की बुनियादी समझ दे और धैर्य से कानूनी प्रक्रिया को अपनाए, तो बिना वकील और पैसे के भी न्याय मिल सकता है। इसके साथ ही यह मामला यह सवाल भी उठाता है कि क्या देश में फ्री लीगल सर्विसेज को और अधिक मजबूत व पहुंच योग्य नहीं बनाया जाना चाहिए?
इस घटना ने साबित कर दिया कि कानून सिर्फ अमीरों का नहीं है – एक आम इंसान भी यदि इच्छाशक्ति और सच्चाई के साथ आगे बढ़े, तो न्याय मिलना मुमकिन है।



