
तेजस फाइटर जेट के हालिया क्रैश ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी है। यह हल्का लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की ताकत का अहम हिस्सा माना जाता है, ऐसे में इसके दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों पर सभी की निगाहें टिकी थीं। घटना के बाद कई तरह की अटकलें लगाई गईं—क्या पायलट ने कंट्रोल खो दिया था? क्या उड़ान के दौरान ब्लैकआउट जैसी स्थिति बनी? या फिर तकनीकी गड़बड़ी हादसे की वजह बनी? इसी बीच एक जाने-माने डिफेंस एक्सपर्ट ने तेजस क्रैश की संभावित वजहों का विस्तृत विश्लेषण पेश किया है, जिसने इस मामले को और स्पष्ट किया है।
डिफेंस एक्सपर्ट के अनुसार हादसे के मूल कारणों को दो प्रमुख पहलुओं में समझा जा सकता है—पायलट फैक्टर और मशीन फैक्टर। पायलट फैक्टर के तहत सबसे बड़ा खतरा “G-LOC” यानी G-force induced Loss of Consciousness का होता है। तेज गति से दिशा बदलने या तीखी मोड़ लेने पर शरीर पर अत्यधिक G-फोर्स पड़ता है, जिससे पायलट कुछ सेकंड के लिए होश खो सकता है। कई देशों की एयरफोर्स में ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। एक्सपर्ट के अनुसार यदि तेजस उड़ान के दौरान अत्यधिक G-लोड झेल रहा था, तो पायलट के ब्लैकआउट होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी बड़ी वजह एयरक्राफ्ट सिस्टम का अचानक फेल होना हो सकती है। तेजस एक अत्याधुनिक डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम पर चलता है। यदि इसमें किसी सेंसर ने गलत डेटा भेजा या कंट्रोल सिस्टम ने अचानक प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया, तो जेट का संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में पायलट कई बार सेकंडों में निर्णय लेने की कोशिश करता है, लेकिन एयरक्राफ्ट अस्थिर हो जाए तो दुर्घटना की संभावना बन जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि हल्के फाइटर जेट में इंजन की अचानक पावर ड्रॉप, फिन या कंट्रोल सरफेस की गड़बड़ी भी हादसे का कारण बन सकती है।
डिफेंस एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना की जांच टीम ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्ड की मदद से सभी पहलुओं की जांच कर रही है। हादसे के दौरान पायलट के अंतिम संवाद, सिस्टम अलर्ट और जेट की पोजिशनिंग से यह साफ हो जाएगा कि क्रैश का सबसे बड़ा कारण क्या था। हालांकि प्राथमिक संकेत बताते हैं कि यह घटना किसी अचानक तकनीकी समस्या या कंट्रोल लॉस की वजह से हुई होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हादसों से सीखकर सिस्टम को और मजबूत बनाया जाता है। तेजस भारत का स्वदेशी गर्व है, और इस जांच के बाद इसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा के स्तर में और सुधार की उम्मीद है।



