राजस्व मामलों के निराकरण में लखनऊ नंबर वन | सीएम योगी के निर्देशों का दिखा असर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर सुर्खियों में है, इस बार वजह बनी है राजस्व मामलों के तेज और प्रभावी निराकरण में प्रथम स्थान प्राप्त करना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों और मॉनिटरिंग व्यवस्था के चलते प्रदेश में राजस्व मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इसका सीधा असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिले ने राजस्व विवादों के समाधान में अन्य सभी जिलों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुछ माह पहले ही सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनता से जुड़ी शिकायतें, खासकर राजस्व मामलों से संबंधित विवाद, समयबद्ध तरीके से निपटाए जाएं। उन्होंने कहा था कि भूमि से जुड़े विवाद आम जनता के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं, इसलिए इन मामलों में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके इन निर्देशों के बाद लखनऊ प्रशासन ने विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का कार्य शुरू किया।
लखनऊ में राजस्व विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया, जिससे हर मामले की स्थिति की निगरानी की जा सके। इसके साथ ही, तहसील स्तर पर विशेष राजस्व शिविरों का आयोजन किया गया, जहाँ अधिकारियों ने मौके पर जाकर विवादों का समाधान किया। इससे न केवल जनता को राहत मिली बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता में भी वृद्धि हुई।
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन महीनों में लखनऊ में 90% से अधिक राजस्व प्रकरणों का निस्तारण किया गया है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है बल्कि योगी सरकार की “जनसुनवाई और जनसंतोष” नीति की सफलता का भी प्रमाण है।
राज्य सरकार अब लखनऊ मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना बना रही है ताकि पूरे प्रदेश में राजस्व विवादों का समाधान तेज़ी और पारदर्शिता के साथ किया जा सके। सीएम योगी ने इसे “जनता के प्रति उत्तरदायित्व और सुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम” बताया है।



