हाई कोर्ट का फैसला: प्रमाणपत्र होने पर मेडिकल टेस्ट अवैध

High Court ने नाबालिग की उम्र निर्धारण को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी प्रमाणपत्र मौजूद है तो किसी भी मेडिकल टेस्ट के जरिए उम्र तय करना अवैध होगा।
इस फैसले का मतलब है कि अब सरकारी दस्तावेज जैसे जन्म प्रमाणपत्र या स्कूल रिकॉर्ड ही उम्र साबित करने के लिए मान्य होंगे। मेडिकल टेस्ट के आधार पर उम्र तय करने की प्रथा अब कानूनी रूप से मान्य नहीं होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इससे उनका शोषण और गलत तरीके से उम्र बढ़ाने या घटाने के प्रयासों पर रोक लगेगी।
अब संबंधित अधिकारी और न्यायिक प्रक्रिया को भी इस दिशा में बदलाव करना होगा। नाबालिग मामलों में उम्र प्रमाणपत्र की मान्यता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और मेडिकल टेस्ट केवल तभी किया जा सकेगा जब प्रमाणपत्र उपलब्ध न हो।



