
राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Mohan Bhagwat ने वैश्विक हालात पर गहरी चिंता जताई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा कि आज दुनिया में जो भी संघर्ष, युद्ध और आक्रमण देखने को मिल रहे हैं, उनकी मूल वजह यह है कि मानव समाज ‘एकत्व’ यानी एकता और परस्पर जुड़ाव की भावना को पहचान नहीं पा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत पर आधारित रही है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की शिक्षा देती है। लेकिन जब मनुष्य अपने स्वार्थ, अहंकार और संकीर्ण सोच में उलझ जाता है, तब वह दूसरे को अलग या विरोधी मानने लगता है और यहीं से टकराव की स्थिति पैदा होती है। भागवत ने कहा कि भारत की सभ्यता और संस्कृति सदियों से मानवता को एकता, सहयोग और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर दुनिया में स्थायी शांति स्थापित करनी है तो देशों और समाजों को ‘मैं और तुम’ की मानसिकता से ऊपर उठकर ‘हम’ की भावना को अपनाना होगा। अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को भी खास संदेश देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों और परंपराओं को समझना चाहिए, क्योंकि यही मूल्य समाज में संतुलन और सद्भाव बनाए रखने में मदद करते हैं। भागवत ने जोर देकर कहा कि केवल आर्थिक या सैन्य शक्ति से दुनिया में स्थायी शांति नहीं लाई जा सकती, बल्कि इसके लिए मन और विचारों में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब समाज में परस्पर विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होगी, तभी वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता संभव हो पाएगी। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से उन्होंने आग्रह किया कि वे समाज में सकारात्मक सोच और एकता के संदेश को आगे बढ़ाएं, ताकि दुनिया को संघर्ष और हिंसा से मुक्त कर एक बेहतर और शांतिपूर्ण भविष्य की ओर ले जाया जा सके।



