
केंद्र सरकार देश के विभिन्न ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग गठित करने के लिए नया विधेयक संसद में लाया जाएगा। प्रस्तावित आयोग ट्रिब्यूनलों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
नियुक्तियों के लिए बनेगा राष्ट्रीय आयोग
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अलग-अलग न्यायाधिकरणों में नियुक्तियों के लिए एक केंद्रीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा। इससे विभिन्न ट्रिब्यूनलों में खाली पदों को भरने और नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार संसद में पेश करेगी विधेयक
सरकार ने इस संबंध में नया कानून लाने की तैयारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक विधेयक मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इसके जरिए ट्रिब्यूनलों की नियुक्ति और प्रशासन से जुड़े मौजूदा ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव है।
ट्रिब्यूनलों में रिक्त पद बड़ी चुनौती
देश के कई न्यायाधिकरणों में लंबे समय से पद खाली रहने और नियुक्तियों में देरी का मुद्दा सामने आता रहा है। नई व्यवस्था का एक उद्देश्य नियुक्तियों में होने वाली देरी को कम करना और ट्रिब्यूनलों के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना भी है।
न्यायिक व्यवस्था पर पड़ेगा असर
ट्रिब्यूनल विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनमें विशेषज्ञता वाले मामलों की सुनवाई होती है। ऐसे में अध्यक्षों और सदस्यों की समय पर नियुक्ति से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित विधेयक के संसद में आने के बाद इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा होगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि राष्ट्रीय आयोग की संरचना, नियुक्ति प्रक्रिया और उसके अधिकार किस तरह निर्धारित किए जाते हैं।



