
देश के निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल आज उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों और निर्यातकों के साथ अहम बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और भारत अपनी निर्यात नीति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मा, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख उद्योगपतियों की भागीदारी होगी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों की चुनौतियों को समझना और उन्हें दूर करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाना है। केंद्र सरकार ने हाल ही में निर्यात में विविधता लाने और स्थानीय उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल टू ग्लोबल’ विजन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी चर्चा की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, पीयूष गोयल व्यापार संतुलन को सुधारने और निर्यात को 2030 तक दोगुना करने के लक्ष्य पर फोकस करेंगे। बैठक में लॉजिस्टिक्स लागत कम करने, बंदरगाहों की कार्यक्षमता बढ़ाने और MSME सेक्टर को निर्यात के लिए प्रोत्साहन देने जैसे मुद्दे भी उठाए जाएंगे। इसके अलावा, भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से जुड़े लाभों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि सरकार उद्योग जगत के सुझावों को नीतिगत स्तर पर लागू करती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। अब सभी की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं कि पीयूष गोयल और उद्योग जगत मिलकर देश के निर्यात को नई उड़ान देने के लिए कौन-कौन से ठोस निर्णय लेते हैं।



