
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन 2025 में इस बार वर्चुअल रूप से शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी का यह निर्णय घरेलू कार्यक्रमों और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय दौरों के कारण लिया गया है। हालांकि, वर्चुअल माध्यम से जुड़ने के बावजूद भारत इस सम्मेलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए अपने दृष्टिकोण को प्रस्तुत करेगा।
आसियान समिट दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन का एक प्रमुख मंच है, जिसमें सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, आपसी व्यापार, और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस बार का एजेंडा विशेष रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, सप्लाई चेन रेज़िलिएंस, टेक्नोलॉजिकल साझेदारी, और सतत विकास पर केंद्रित रहेगा। भारत के लिए यह मंच महत्वपूर्ण है क्योंकि आसियान देश “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” का अहम हिस्सा हैं, जिसके तहत भारत पूर्वी एशिया के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर काम कर रहा है।
सम्मेलन में भारत-आसियान डिजिटल कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा, और ब्लू इकोनॉमी से जुड़े सहयोग पर भी चर्चा होगी। पीएम मोदी अपने संबोधन में क्षेत्र में मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आवश्यकता पर बल दे सकते हैं। साथ ही, भारत द्वारा हाल के वर्षों में शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को आसियान देशों के साथ साझा करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी का वर्चुअल रूप से शामिल होना केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि भारत डिजिटल कूटनीति और तकनीकी समाधान को भविष्य के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखता है। आसियान शिखर सम्मेलन 2025 भारत के लिए अपने पड़ोसी और साझेदार देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को और गहरा करने का एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।



