प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक दृश्य सामने आया जिसने देशभर के लोगों का दिल छू लिया। कार्यक्रम में एक नेत्रहीन बच्ची बबली ने जब चश्मा पहनने के बाद खुशी से कहा, “माय नेम इज बबली, अब मैं आपको देख सकती हूं,” तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। प्रधानमंत्री खुद भी भावुक हो गए और उन्होंने बबली के सिर पर स्नेहपूर्वक हाथ रखकर उसे आशीर्वाद दिया।
बबली उन बच्चों में से एक थी जिन्हें आधुनिक तकनीक से तैयार विशेष दृष्टिवर्धक चश्मा प्रदान किया गया था। प्रधानमंत्री ने खुद उसके चेहरे पर चश्मा पहनाया, और जैसे ही बबली ने स्पष्ट रूप से देख पाना शुरू किया, वह खुशी से झूम उठी और बोली, “अब मैं सबको देख सकती हूं!” यह क्षण न केवल तकनीक की ताकत को दर्शाता है, बल्कि सरकार की दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशीलता और समर्पण को भी दिखाता है।
कार्यक्रम में ही मौजूद एक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे – दिव्यांग क्रिकेटर विकास। प्रधानमंत्री ने उनसे संवाद करते हुए कहा,
“तुम रुको मत, आगे बढ़ो, हम सब तुम्हारे साथ हैं।”
उन्होंने विकास की हिम्मत और प्रतिभा की सराहना की और कहा कि वह भारत का नाम रोशन करने वाले युवा हैं, जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों की शक्ति को समाज को समझना और सम्मान देना चाहिए। यह सरकार की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि देश की सामूहिक भावना होनी चाहिए कि हम सब मिलकर समाज के हर वर्ग को समान अवसर और सम्मान दें। उन्होंने यह भी कहा कि “आज का भारत सहानुभूति नहीं, सशक्तिकरण की भावना के साथ काम कर रहा है।”
इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सरकार दिव्यांगजनों के लिए न केवल सुलभ भारत अभियान चला रही है, बल्कि उन्हें तकनीक, शिक्षा और खेल जैसे हर क्षेत्र में आगे लाने के लिए हरसंभव सहायता दे रही है।
बबली और विकास की यह कहानी अब सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि उस नए भारत की तस्वीर है जो संवेदनशील, समावेशी और प्रेरक है। यह क्षण दिखाता है कि एक सच्चा नेता वही होता है जो सबसे कमजोर को भी सबसे आगे लाकर खड़ा कर सके।
प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम लोगों के दिल में आशा, आत्मबल और बदलाव की भावना छोड़ गया, और यह संदेश भी कि भारत तभी प्रगति करेगा जब हर हाथ को काम, हर आंख को दृष्टि और हर कदम को समर्थन मिलेगा।



