
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का दो दिवसीय भारत दौरा 2025 राजनीतिक और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर है, बल्कि वैश्विक व्यापार, रक्षा और सुरक्षा रणनीतियों पर भी केंद्रित रहेगा। इस दौरे में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें डिफेंस डील, व्यापार संबंध, ऊर्जा क्षेत्र, वैश्विक टैरिफ नीतियाँ और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा शामिल हैं।
1. डिफेंस डील में तेजी:
भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग रहा है। इस दौरे के दौरान नई डिफेंस डील पर चर्चा की जाएगी। विशेष रूप से हवाई जहाज, हथियार प्रणाली और रूसी तकनीक के साझा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित होगा। इससे भारतीय सेना की आधुनिककरण प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों में और मजबूती आएगी।
2. व्यापार और निवेश पर जोर:
दोनों देश आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृषि जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा होगी। पुतिन के दौरे का उद्देश्य भारतीय बाजार में रूसी कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाना और द्विपक्षीय व्यापार को अगले स्तर पर ले जाना है।
3. US टैरिफ और वैश्विक व्यापार:
दौरे के दौरान अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लागू किए गए टैरिफ और व्यापार बाधाओं पर भी बातचीत होने की संभावना है। भारत और रूस दोनों ही वैश्विक व्यापार नीति और टैरिफ विवादों को लेकर साझा रणनीति तैयार करना चाहते हैं।
4. ऊर्जा सहयोग:
रूस भारत को तेल, गैस और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव दे सकता है। यह ऊर्जा सुरक्षा और दोनों देशों की ऊर्जा जरूरतों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।
5. अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा:
अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी दोनों नेता चर्चा करेंगे। अफगानिस्तान, मध्य एशिया और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय बैठक में शामिल होंगे।
कुल मिलाकर पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई गहराई लाने, व्यापार और रक्षा सहयोग को बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का अवसर है। यह दोनों देशों के लिए कई रणनीतिक और आर्थिक लाभ सुनिश्चित कर सकता है।



