
SCO शिखर सम्मेलन की एक ग्रुप फोटो को एडिट कर साझा करने को लेकर पाकिस्तान की जमकर आलोचना हो रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्रॉप कर दिया गया। इस तस्वीर के सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक नेताओं ने पाकिस्तान के रवैये पर सवाल उठाए।
मामला तब सामने आया जब SCO सम्मेलन के बाद नेताओं की आधिकारिक ग्रुप फोटो सोशल मीडिया पर साझा की गई। पाकिस्तान की ओर से जारी संस्करण में कुछ नेताओं को तस्वीर से हटा दिया गया था। इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरी ग्रुप फोटो साझा की, जिसमें सभी नेताओं की मौजूदगी दिखाई दे रही थी।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पाकिस्तान के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे पाकिस्तान की असुरक्षा और मानसिकता का संकेत बताया। शिंदे ने कहा कि तस्वीर से किसी नेता को क्रॉप करने से उसकी वैश्विक भूमिका या प्रभाव कम नहीं हो जाता।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एमजे अकबर ने भी पाकिस्तान के इस कदम की आलोचना की। उनके मुताबिक, किसी अंतरराष्ट्रीय मंच की आधिकारिक तस्वीर में इस तरह की छेड़छाड़ करना पाकिस्तान की ही छवि को नुकसान पहुंचाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति को लेकर असुरक्षा की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं। SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की नीति की आलोचना की थी। उन्होंने आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने और उसके खिलाफ बिना किसी दोहरे मापदंड के कार्रवाई की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में आया। हालांकि मोदी ने पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन आतंकवाद को समर्थन और सुरक्षित पनाहगाह देने वाले देशों के खिलाफ उनका संदेश स्पष्ट माना गया। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर यह बयान खास तौर पर चर्चा में रहा।
ग्रुप फोटो विवाद को इसी व्यापक कूटनीतिक तनाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। एक ओर SCO में दोनों देशों के नेता एक ही मंच पर मौजूद थे, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से साझा की गई एडिटेड तस्वीर ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। इससे दोनों देशों के बीच जारी तनाव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।
दिलचस्प बात यह है कि तस्वीर को क्रॉप करने से विवाद खत्म होने के बजाय पाकिस्तान की ही आलोचना बढ़ गई। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे कि किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की तस्वीर को इस तरह संपादित करने की जरूरत क्यों पड़ी। आलोचकों ने इसे कूटनीतिक अपरिपक्वता करार दिया।
भारत की ओर से साझा की गई पूरी तस्वीर ने भी इस विवाद को और तूल दिया। इससे दोनों देशों द्वारा एक ही कार्यक्रम को अलग-अलग तरीके से पेश करने का अंतर सामने आया। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तस्वीरें और सार्वजनिक प्रतीकात्मक गतिविधियां भी संदेश देने का माध्यम होती हैं, इसलिए इस घटना को महज फोटो एडिटिंग तक सीमित नहीं माना जा रहा है।
SCO जैसे बहुपक्षीय संगठन में सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद साझा मंच और आधिकारिक कार्यक्रमों की मर्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसी नेता को आधिकारिक ग्रुप फोटो से हटाने का फैसला राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा सकता है।
भारत की ओर से इस घटनाक्रम पर आई प्रतिक्रियाओं में प्रधानमंत्री मोदी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और भारत की मजबूत होती कूटनीतिक स्थिति का उल्लेख किया गया। नेताओं ने कहा कि किसी तस्वीर में जगह देने या हटाने से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में किसी देश या नेता की वास्तविक स्थिति नहीं बदलती।
फिलहाल फोटो विवाद ने SCO सम्मेलन की अन्य महत्वपूर्ण चर्चाओं के बीच भारत-पाकिस्तान संबंधों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान की ओर से इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई आती है या नहीं और क्या यह विवाद दोनों देशों की कूटनीतिक बयानबाजी को और तीखा करता है।



