
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर हाल ही में आई एक नई किताब में ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने भारत-बांग्लादेश संबंधों के इतिहास को एक नया मोड़ दे दिया है। किताब के अनुसार, भारत से दोपहर 1:30 बजे आई एक फोन कॉल ने शेख हसीना की जान बचा ली थी। यह घटना उस समय की है जब बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की साजिशें चरम पर थीं।
किताब में बताया गया है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उस दिन एक संभावित आतंकी हमले की जानकारी हासिल की थी, जिसमें शेख हसीना को निशाना बनाए जाने की योजना थी। जानकारी मिलते ही भारत की ओर से सीधे ढाका स्थित सुरक्षा अधिकारियों और प्रधानमंत्री कार्यालय को अलर्ट भेजा गया। यह कॉल लगभग दोपहर 1:30 बजे की थी। अलर्ट मिलने के तुरंत बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और कुछ मिनटों के भीतर ही उस क्षेत्र से संदिग्ध गतिविधियां पकड़ी गईं।
किताब में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि उस कॉल के चलते शेख हसीना का कार्यक्रम आखिरी समय में रद्द किया गया, और यही फैसला उनकी जान बचाने में निर्णायक साबित हुआ। इसके बाद बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों ने जांच शुरू की और हमले की साजिश से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया।
यह घटना भारत और बांग्लादेश के बीच गहरी रणनीतिक साझेदारी का एक उदाहरण मानी जा रही है। शेख हसीना कई बार सार्वजनिक मंचों पर भारत के सहयोग की सराहना कर चुकी हैं। किताब में यह भी उल्लेख है कि भारत ने हमेशा बांग्लादेश की सुरक्षा, आर्थिक विकास और आतंकवाद विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह खुलासा न केवल दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रही है।
कुल मिलाकर, इस नई किताब के जरिए यह तथ्य सामने आया है कि भारत से आई एक कॉल ने न केवल एक नेता की जान बचाई, बल्कि दक्षिण एशिया के इतिहास को भी बदल दिया।



