
देश के 12 राज्यों में आज से एसआईआर (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत हो रही है, जो आगामी 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। इस व्यापक अभियान में उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं। यह प्रक्रिया केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था, नीतिगत क्रियान्वयन और विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है।
सूत्रों के अनुसार, SIR यानी “Systematic Inspection and Review” (सिस्टेमैटिक इंस्पेक्शन एंड रिव्यू) अभियान के तहत सरकारी विभागों के कार्यों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, शहरी विकास और ग्रामीण योजनाओं से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तैयार की जाएगी। राज्य सरकारों को केंद्र को हर सप्ताह रिपोर्ट सौंपनी होगी ताकि समय पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया विशेष रूप से 75 जिलों में एक साथ शुरू की गई है। वहीं, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी अधिकारियों को जिलास्तर पर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान का लक्ष्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाना, जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करना और योजनाओं में भ्रष्टाचार को खत्म करना है।
SIR प्रक्रिया के दौरान जिलाधिकारियों, ब्लॉक स्तर के अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। केंद्र सरकार का मानना है कि इस प्रकार की समीक्षा से न केवल कामकाज की दक्षता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ भी मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अभियान देश में “गुड गवर्नेंस” (सुशासन) की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि इसे गंभीरता से लागू किया गया, तो भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।



