श्रद्धा, समर्पण और जुनून की मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश के दर्जनों छात्र कांवड़िये 121 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर लखनऊ पहुंचे। इन छात्रों का लक्ष्य था — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रतीकात्मक रूप से गंगाजल चढ़ाना। पूरे रास्ते में उन्होंने बारिश, गर्मी, थकावट और पुलिस की सख्ती का भी सामना किया, लेकिन उनकी आस्था डगमगाई नहीं। उन्होंने गाजियाबाद से यात्रा की शुरुआत की और कई दिनों तक लगातार पैदल चलते हुए राजधानी लखनऊ पहुंचे।
इन कांवड़ियों का कहना था कि वे योगी आदित्यनाथ को एक संत के रूप में देखते हैं और उन्हें जल चढ़ाना शिवभक्ति का हिस्सा मानते हैं। लेकिन जब वे लखनऊ के बाहरी इलाकों में पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर सुरक्षा कारणों से रोक लिया और एक वाहन में ठूंसकर दूसरी जगह पहुंचा दिया। इससे कुछ छात्रों में नाराजगी भी देखी गई, लेकिन वे शांतिपूर्ण रहे और शिव नाम का जाप करते रहे।
इस पूरी यात्रा के दौरान लगातार बारिश हो रही थी, कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न थीं, लेकिन युवाओं के हौसले कम नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ शारीरिक परीक्षा नहीं थी, यह मन और आत्मा की परीक्षा भी थी, जिसमें उन्हें शिव की शक्ति ने बल दिया। स्थानीय लोगों ने कई जगह इन छात्रों को जल, फल और छाया दी।
यह घटना न सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आज का युवा धर्म और नेतृत्व दोनों के प्रति जागरूक है। इन कांवड़ियों का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संकल्प, अनुशासन और नेतृत्व के प्रति आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे में जब पुलिस द्वारा रोकने की बात सामने आई, तो सवाल उठे कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में श्रद्धा की अभिव्यक्ति पर भी रोक लगेगी?
छात्रों ने अंततः योगी आदित्यनाथ के प्रतीकात्मक स्वरूप को जल चढ़ाया और यात्रा का समापन किया। यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए श्रद्धा, साहस और संकल्प का उदाहरण बन गई है।



