IAS अधिकारी इंद्रजीत का लखनऊ में स्वच्छ भारत मिशन को लागू करने का अनुभव न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह दिखाता है कि जब एक अधिकारी खुद पहल करता है, तो बदलाव ज़रूर आता है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने सबसे पहले स्वच्छ भारत मिशन की गाइडलाइनों को गहराई से पढ़ा और स्वयं उन्हें समझा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि अभियान केवल कागज़ों पर न रहे, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी असर दिखे। इंद्रजीत ने कहा, “मैं खुद गाइडलाइन पढ़ता था, अधिकारियों को पढ़ाता था और यह देखता था कि हर नियम का पालन हो।”
उनके नेतृत्व में सफाईकर्मियों की ट्रेनिंग से लेकर शहर की गलियों तक में मॉनिटरिंग का विशेष ध्यान रखा गया। उन्होंने न केवल नगर निगम को सक्रिय किया, बल्कि आम जनता को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी दफ्तरों और सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई को एक संस्कार के रूप में स्थापित किया गया। इंद्रजीत ने बताया कि वे स्वयं सुबह-सुबह निरीक्षण पर निकलते थे और गंदगी मिलने पर तुरंत कार्रवाई करते थे।
उनके इस समर्पण ने लखनऊ को ‘क्लीन सिटी मॉडल’ के रूप में पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत सिर्फ अभियान नहीं, बल्कि जीवनशैली बननी चाहिए। उनकी इस पहल से साफ है कि जब प्रशासनिक अधिकारी स्वयं गाइडलाइन को गंभीरता से लेते हैं और टीम भावना से कार्य करते हैं, तो उसका प्रभाव हर नागरिक पर पड़ता है। लखनऊ में उनका यह कार्यकाल स्वच्छता के क्षेत्र में एक आदर्श उदाहरण बन चुका है, जिसकी सराहना उच्च स्तर पर भी हुई है।



