
देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने संघ लोक सेवा आयोग संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर के उपयोग को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने आयोग से इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है और जवाब प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर स्पष्टीकरण देने की मोहलत दी है। यह मामला दृष्टिबाधित और दिव्यांग अभ्यर्थियों को सिविल सेवा परीक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि तकनीकी व्यवस्थाओं की कमी या स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अदालत ने टिप्पणी की कि समानता और समावेशन संविधान के मूल सिद्धांत हैं, ऐसे में परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि आयोग ने स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की उपलब्धता, मानकीकरण और सुरक्षा को लेकर अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करने को कहा गया कि परीक्षा केंद्रों पर तकनीकी सहायता और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किस स्तर तक सुनिश्चित की गई है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि दिव्यांग उम्मीदवारों को डिजिटल साधनों के उपयोग में बाधा आती है तो यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्देश भविष्य की परीक्षाओं में तकनीकी समावेशन को और मजबूत करेगा। अब निगाहें UPSC के हलफनामे पर टिकी हैं, जिसमें आयोग को बताना होगा कि वह किस प्रकार पारदर्शिता, सुरक्षा और समान अवसर के सिद्धांतों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। यह फैसला न केवल दिव्यांग अभ्यर्थियों बल्कि समावेशी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



